माता मंजेस्वरी देवी के बारे में!
मंझगई स्थित माता मंजेश्वरी देवी मंदिर
अंजू सिंह, मंदिर प्रमुख, बहन माता मंजेश्वरी देवी
जय माता मंजेस्वरी देवी शक्तिपीठ मझगई धाम
संवादसूत्र पलियाकलां (लखीमपुर) मंझगई स्थित माता मंजेस्वरी देवी मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पलिया क्षेत्र के मंझगई कस्बे में एक क्षत्रिय परिवार में 12 जून सन 1972 को मंजेश्वरी देवी का जन्म हुआ था।
पलियाकलां (लखीमपुर) : मंझगई स्थित माता मंजेश्वरी देवी मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां पलिया व आसपास क्षेत्र के अलावा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त पूजन-अर्चन के लिए आते हैं। मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के चलते भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
मंझगई कस्बे में एक क्षत्रिय परिवार में 12 जून सन 1972 को मंजेश्वरी देवी का जन्म हुआ था। इनके माता-पिता मदारी सिंह व पवन कुमारी ने बड़े ही प्यार-दुलार से बिटिया को पालना शुरू किया। अल्प अवस्था में ही उनके द्वारा तमाम चमत्कार लोगों को देखने को मिले। जब वे 12 वर्ष की हुईं तो उन्होंने अन्न-जल त्याग कर समाधि ले ली थी। उन्होंने 26 जुलाई सन 1996 को अपने शरीर को त्याग दिया। उसके बाद से ही यहां पर भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। वर्तमान में यहां एक भव्य चार मंजिला मंदिर का निर्माण जापानी मॉडल पर किया गया है।
विशेषता
लखीमपुर जिले का ही नहीं बल्कि आसपास क्षेत्र का यह अनोखा मंदिर है। यहां हर वर्ष 12 जून को माता मंजेश्वरी देवी का वार्षिकोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसमें भव्य जागरण, शोभायात्रा और भंडारा होता है। 26 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि पर विशाल भंडारे का व भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। शारदीय नवरात्र भर भी यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है। क्षेत्र के गणमान्य व प्रतिष्ठित लोगों के द्वारा सुबह व शाम की आरती, नवमी और दशमी के अवसर पर हवन पूजन के उपरांत कन्या भोज व भंडारा प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हैं।
मुझे पिछले कुछ वर्षों से मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों में सहयोग करने का अवसर मिल रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी होती हैं। मंदिर जापानी मॉडल पर तैयार किया गया है जोकि काफी भव्य है। मंदिर निर्माण में सभी का सहयोग मिला। आज यह यहां की पहचान बनकर उभरा है। नवरात्र पर सुबह और शाम आरती में भी भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
माता मंजेश्वरी देवी सेवा दल
प्रारंभ में एक छोटे मंदिर का निर्माण हुआ था, लेकिन अब क्षेत्रवासियों व मां के भक्तों के सहयोग से यहां भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। चार मंजिला मंदिर के अलग-अलग तल में माता जी से जुड़ी हुई वस्तुओं को रखा गया है। हर साल वार्षिकोत्सव में अलग-अलग प्रदेशों के साथ पड़ोसी मुल्क नेपाल के भक्त यहां उमड़ते हैं। प्रत्येक वर्ष पांच प्रमुख आयोजन मंदिर में संपन्न होते हैं।
अंजू सिंह, मंदिर प्रमुख, बहन माता मंजेश्वरी देवी